जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. की श्रेष्ठता को बयान करना हम जैसे गुनहगारों के बस में नहीं है। हम न उनकी श्रेष्ठता को समझ सकते हैं और नाहि बयान कर सकते हैं। हाँ! वह लोग जो उनकी तरह मासूम हैं और जिनके लिये आयते ततहीर नाज़िल हुई उन पाक ज़बानों से बीबी की श्रेष्ठता को समझा जा सकता है। हमारे मासूम इमामों नें बीबी ज़हरा स. के बारे में क्या कहा है इस पर एक नज़र डालते हैं: हज़रत अली अ. की नज़र मेंजनाबे ज़हरा स. नें अपने जीवन के आख़िरी दिनों में अपने पति हज़रत अली अ. को वसीयत की और फ़रमाया: ऐ मेरे चचा के बेटे! आपनें ज़िन्दगी में कभी मुझे झूठा और विश्वास घाती नहीं पाया और मैंने कभी भी आपकी इच्छा का विरोध नहीं किया।यह सुन कर हज़रत अली अ. नें फ़रमाया: आप बहुत ज्ञानी, बुद्धिमान, नेक और समान्य हैं इस लिये आपका मेरी इच्छा के विरुद्ध जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। आप मुझसे दूर जा रही हैं जो मेरे लिये बहुत कठिन है लेकिन इसके अलावा कोई चारा भी नहीं है। ख़ुदा की क़सम! आपके जाने के बाद वह ज़ख़्म फिर से नये हो जाएंगे जो रसूले ख़ुदा स.अ. के देहांत के बाद मुझे लगे थे।इमाम अली अ. की नज़र में जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. की की श्रेष्ठता का अन्दाज़ा उस ख़त से लगाया जा सकता है जो आप नें मुआविया को लिखा था और उसमें अपने बेटों इमामे हसन व हुसैन अ. और जनाबे फ़ातिमा की तरफ़ इशारा करते हुए लिखा था: “जन्नत के जवानों के दो सरदारों के साथ मेरा रिश्ता है और सारी दुनिया की औरतों की सरदार हम में से है।” इमाम अली अ. का एक शेर (पंक्ति) है जिसमें आप जनाबे फ़ातिमा स. का नाम लेते हुए फ़रमाते हैं: “मुझे फ़ातिमा और उनके बेटों पर गर्व है। मुझे रसूले ख़ुदा पर गर्व है। मुझे उस दिन पर गर्व है जिस दिन रसूले ख़ुदा फ़ातिमा स. की शादी मुझसे की”। इमाम हुसैन अ. की नज़र मेंइमाम हसन अ. फ़रमाते हैं: एक रात मैंने देखा कि मेरी माँ ख़ुदा की इबादत लिये खड़ी हुई और सुब्ह तक रुकू, सजदे और इबादत करती रहें। फिर मैंने सुना कि वह मर्दों और औरतों में एक एक का नाम लेकर उनके लिये दुआ करने लगीं। उन्होंने सबके लिये दुआ की लेकिन अपने लिये कोई दुआ नहीं की। यह देखकर मैं माँ के पास गया और उनसे पूछा: माँ! आप सब के लिये दुआ करती हैं लेकिन अपने लिये दुआ क्यों नहीं करतीं? आपने जवाब में फ़रमाया: बेटा! पहले पड़ोसी फिर घर! इमाम हुसैन अ. की नज़र मेंआशूरा के दिन जब दुश्मन नें चारों तरफ़ से इमाम हुसैन अ. को घेर लिया तो इमाम नें एक ख़ुतबा दिया और फ़रमाया: तुम लोगों नें मुझे क़त्ल हो जाने या ज़लील होने को कभी स्वीकार नहीं कर सकता। ख़ुदा और उसके रसूल नें मुझे इस काम से रोका है। और वह पवित्र कोख जिसमें मैंने जन्म लिया है मुझे इस बात की इजाज़त नहीं देती। इमाम हुसैन अ. नें अपने दुश्मन के सामने डटे रहने का एक कारण यह बताया है कि वह एक पवित्र माँ (जनाब फ़ातिमा स.) की कोख में बड़े हुए हैं।इमाम सज्जाद अ. की नज़र में इमाम सज्जाद अ. फ़रमाते हैं: जब क़यामत का दिन होगा एक आवाज़ आएगी: आज के दिन हर तरह का डर दिल से निकाल दो। सब लोग यह सुनकर अपना सर ऊपर उठाएंगे। फिर जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. आएंगी तो हुक्म होगा सब लोग अपने सरों को झुका लें उन लोगों को छोड़कर जो अहलेबैत अ. से मुहब्बत करने वाले हैं। उस समय ऐलान होगा: यह पैग़म्बर की बेटी फ़ातिमा है। वह और उनके रास्ते पर चलने वाले जन्नत में चले जाएंगे। ख़ुदा एक फ़रिश्ते को उनके पास भेजेगा जो उनसे कहेगा: ख़ुदा से अपनी माँग बयान कीजिए। बीबी कहेंगी: ख़ुदाया! मेरी मांग यह है कि मुझे और जिन लोगों नें मेरे बेटों की सहायता की है उनको माफ़ कर दे।इमाम मोहम्मद बाक़िर अ. की नज़र मेंइमाम मोहम्मद बाक़िर अ. जाबिर से फ़रमाते हैं: जब क़यामत का दिन होगा जिब्रईल आवाज़ देंगे: ख़ुवैलद की बेटी ख़दीजा कहाँ हैं? मुज़ाहिम की बेटी आसिया कहाँ हैं? मूसा की बहन उम्मे कुलसूम कहाँ हैं? वह सब अपनी जगह से खड़ी होंगी और सामने आएंगी। फिर एक आवाज़ आएगी: ऐ लोगों! आज के दिन मैंने मोहम्मद स.अ., अली अ., हसन अ., हुसैन अ. और फ़ातिमा अ. के लिये ख़ास सम्मान का दिन रखा है। सरों को झुका लो और आँखे बन्द कर लो क्योंकि अब फ़ातिमा आ रही हैं। फिर जिब्रईल एक जंनती ऊँट लाएंगे और उन्हें उस पर बैठा कर जन्नत में ले जाएंगे, लेकिन जब वह जन्नत के पास पहुँचेंगी तो रुक जाएंगी। ख़ुदा पूछेगा: आप रुक क्यों गईं हैं? बीबी फ़रमाएंगी:मैं चाहती हूँ कि आज सब को मेरा मरतबा पता चल जाए! ख़ुदा फ़रमाएगा: ऐ मेरे हबीब की बेटी! इनमें से जो आपका चाहने वाला हो और जिसको आप चाहें अपने साथ जन्नत में ले जा सकती हैं।फिर इमाम मोहम्मद बाक़िर अ. फ़रमाते हैं: ऐ जाबिर ख़ुदा की क़सम! जिस तरह एक चिड़िया अच्छे दानों को ख़राब दानों से अलग करती है उसी तरह जनाबे फ़ातिमा अपने शियों और चाहने वालों को लोगों के बीच से अलग करेंगी।इमाम जाफ़र सादिक़ अ. की नज़र मेंअल्लामा मजलिसी इमाम सादिक़ अ. से एक रिवायत बयान करते हैं: जनाबे फ़ातिमा सबसे सच्ची हैं। तमाम नबियों की नुबूव्वत का केन्द्र जनाबे फ़ातिमा की पहचान रही है।सय्यद हाशिम बहरानी इमाम सादिक़ अ. की एक हदीस इस तरह बयान करते हैं: किसी भी नबी की नुबूव्वत उस समय तक पूरी नहीं हुई जब तक उसनें जनाबे फ़ातिमा की श्रेष्ठता को स्वीकार नहीं किया और उनके साथ अपनी मोहब्बत का इज़हार नहीं किया।इमाम सादिक़ आयत: ’’اِنَّا اَنزَلنَاہُ فِی لَیلَۃُ القَدرِ‘‘के बारे में फ़रमाते हैं यहाँ ’’لَیلَۃُ ‘‘जनाबे फ़ातिमा और’’القَدر ‘‘ ख़ुदा को कहा गया है। जिसनें जनाबे फ़ातिमा को सही तरह से पहचान लिया उसनें, “क़द्र की रात” को समझ लिया।
15 अप्रैल 2013 - 19:30
समाचार कोड: 409755
जनाबे ज़हरा स. नें अपने जीवन के आख़िरी दिनों में अपने पति हज़रत अली अ. को वसीयत की और फ़रमाया: ऐ मेरे चचा के बेटे! आपनें ज़िन्दगी में कभी मुझे झूठा और विश्वास घाती नहीं पाया और मैंने कभी भी आपकी इच्छा का विरोध नहीं किया......